विलफुल डिफॉल्टर्स, बैड लोन और राइट-ऑफ के बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण ने मंगलवार रात एक के बाद एक 13 ट्वीट के जरिये जवाब दिया। सीतारमण ने कहा कि वह तथ्यों को सनसनीखेज बनाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि अच्छा होता यदि राहुल गांधी लोन के राइट ऑफ के बारे में डॉ. मनमोहन सिंह से चर्चा कर लेते। सीतारमण ने अपने ट्वीट की श्रृंखला में कहा कि लोकसभा के सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बेशर्मी के साथ लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है। जैस कांग्रेस हमेशा करती है, उन्होंने मुद्दे को समझे बिना तथ्यों को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की।
Shri @RahulGandhi MP (LS) and Shri @rssurjewala spokesperson of @INCIndia have attempted to mislead people in a brazen manner. Typical to @INCIndia, they resort to sensationalising facts by taking them out of context. In the following tweets wish to respond to the issues raised.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 28, 2020
Provisions are made for NPAs as per the four-year provisioning cycle laid down by the @RBI. Upon full provisioning being done banks write-off the fully provided NPA but continue to pursue recovery against the borrower. No loan is waived off.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 28, 2020
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची में सत्ताधारी पार्टी के मित्रों का भी नाम है
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विलफुल डिफॉल्टटर्स की एक सूची जारी किए जाने के बाद राहुल गांधी ने सत्ताधारी भाजपा पर हमला करते हुए कहा था कि सरकार ने संसद से यह सूची छिपाई थी, क्योंकि इसमें सत्ताधारी पार्टी के मित्रों का भी नाम है। आरबीआई द्वारा जारी सूची में शामिल लोगों पर बैंकों को धोखा देने का आरोप है। कांग्रेस सांसद ने एक वीडियो के साथ हिंदी में पोस्ट किए गए एक ट्वीट में कहा था कि मैंने संसद में बस एक सवाल किया था- 50 सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी करने वालों के नाम बताइए। वित्त मंत्री ने जवाब देने से इन्कार कर दिया। अब आरबीआई ने सूची में नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और भाजपा के अन्य मित्रों के नाम बताए हैं। यही कारण है कि उन्होंने संसद से तथ्यों को छिपाया था।
Shri @RahulGandhi MP (LS) and Shri @rssurjewala spokesperson of @INCIndia have attempted to mislead people in a brazen manner. Typical to @INCIndia, they resort to sensationalising facts by taking them out of context. In the following tweets wish to respond to the issues raised.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 28, 2020
सीतारमण ने कहा- 2009-10 से 2013-14 तक बैंकों ने 1,45,226 करोड़ रुपए के लोन को राइट ऑफ किया था
सीतारमण ने जवाब में कहा कि 2009-10 से लेकर 2013-14 तक सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंकों ने 1,45,226 करोड़ रुपए के लोन को राइट ऑफ किया था। उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई द्वारा निर्धारित 4 वर्षीय प्रोविजनिंग साइकिल के तहत एनपीए के लिए प्रोविजनिंग की जाती है। जिन एनपीए के विरुद्ध पूरी तरह प्रोविजनिंग हो जाती है, उन्हें राइट ऑफ कर दिया जाता है, लेकिन बैंक डिफॉल्टर्स से वसूली की कोशिश जारी रखते हैं। किसी भी लोन को माफ नहीं किया गया है।
वित्त मंत्री ने रघुराम राजन का हवाला देते हुए कहा कि अधिकतर बैड लोन 2006-2008 में जारी हुए थे
सीतारमण ने कहा कि ऐसे डिफॉल्टर जो क्षमता होने के बाद भी लोन नहीं चुकाते, फंड को दूसरे मद में डायवर्ट कर देते हैं, गबन करते हैं या बैंक की अनुति के बिना सुरक्षित संपत्तियों को बेच डालते हैं, उन्हें विलफुल डिफॉल्टर माना जाता है। वे सत्ता से संपर्क रखने वाले ऐसे प्रमोटर्स हैं, जिन्होंने यूपीए की फोन बैंकिंग प्रणाली का लाभ उठाया था। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में आरबीआई के बवर्नर रहे रघुराम राजन का हवाला देते हुए कहा कि अधिकतर बैडलोन 2006 से 2008 के बीच दिए गए थे। ऐसे वेल-कनेक्टेड प्रमोटर्स को बहुत सारे लोन दे दिए गए थे, जिनके पास डिफॉल्ट करने का इतिहास जुड़ा हुआ था। निजी बैंक उन्हें लोन देना बंद कर रहे थे, फिर भी सरकारी बैंकों ने उन्हें लोन देना जारी रखा। आरबीआई लोन की गुणवत्ता पर ज्यादा सवाल उठा सकता था। सीतारमण ने कहा कि 2015 में सरकार ने सरकारी बैंकों से कहा कि वे विलफुल डिफॉल्टर्स की पहचान करें और 50 करोड़ से ऊपर के सभी एनपीए की जांच करें।
नीरव मोदी, मेहुल चोकसी व विजय माल्या मामले में प्रगति का अलग-अलग ट्वीट में ब्योरा दिया
इसके बाद सीतारमण ने अलग-अलग ट्वीट में नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या के मामले में हुई प्रगति का ब्योरा दिया।
नीरव मोदी के मामले में उन्होंने कहा कि 2,387 करोड़ रुपए से ज्यादा की चल-अचल संपत्तियों को अटैच या सीज किया गया। इसके तहत 961.47 करोड़ रुपए की विदेशी संपत्तियों को अटैच किया गया। 53.45 करोड़ रुपए की विलासिता वाली संपत्तियों की नीलामी हुई। वह अभी ब्रिटेन में है।
...while private sector banks were getting out. RBI could have raised more flags about the quality of lending...” RR Rajan.(Source: @IndiaToday Sept 11,2018 and many other print& electronic media). From 2015, PSBs were asked by GoI to check all NPAs >50 crore for wilful default.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 28, 2020
मेहुल चोकसी के मामले में उन्होंने एक अलग ट्वीट में कहा कि उसकी 1,936.95 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया गया, जिनमें से 67.9 करोड़ रुपए की विदेशी संपत्तियां हैं। 597.75 करोड़ रुपए की संपत्तियां सीज की गईं। रेड नोटिस जारी हो चुका है। एंटीगुआ को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा गया है। मेहुल चोकसी को भगोड़ा अपराधी घोषित किए जाने के मामले में सुनवाई जारी है।
Nirav Modi Case : Immovable and movable properties worth more than Rs 2387 Crore attached/seized.( Attachment Rs 1898 Crore and Seizure Rs 489.75 Crore) . This includes foreign attachments of Rs 961.47 Crore. Auction of luxury items for Rs 53.45 Crore. He is in prison in the UK.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 28, 2020
विजय माल्या के मामले में उन्होंने कहा कि अटैच की गई संपत्तियों को अटैचमेंट के समय कुल मूल्य 8,040 करोड़ रुपए था। सीज की गई संपत्तियों का उस वक्त कुल मूल्य 1,963 करोड़ रुपए था। भगोड़ा अपराधी घोषित किया जा चुका है। भारत सरकार की ओर से किए गए प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद ब्रिटेन की अदालत ने भी प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला दिया है।
Mehul Choksi Case : Attachments of Rs 1936.95 Crore including foreign attachment of Rs 67.9 Crore. Seizure of Rs 597.75 Crore. Red Notice issued. Extradition Request sent to Antigua. Hearing for declaration of Mehul Choksi as Fugitive Offender is in progress.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 28, 2020
नीरव मोदी, मेहुल चोकसी व विजय माल्या की कुल 18,332.7 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच
सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इन मामलों को आगे बढ़ाया। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या के मामले में कुल 18,332.7 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गई हैं। टॉप 50 विलफुल डिफॉल्टर्स पर बकाया राशि और उनकी अटैच की गई राशि का ब्योरा तारांकित सवाल 305 के जवाब के एनेक्सर में दिया या था। यह सवाल राहुल गांधी ने 16 मार्च 2020 को पूछा था। वश्विक परिचालन वाले और 5 करोड़ रुपए से अधिक बकाया वाले विलफुल डिफॉटर्स की जो सूची सरकारी बैंकों ने तैयार की है, उसका ब्योरा संसद में पिछले साल 18 नवंबर को दिया गया था। कांग्रेस व राहुल गांधी को खुद से पूछना चाहिए कि उन्होंने भ्रष्टाचार को क्यों खत्म नहीं किया। भ्रष्टाचार व मित्रवाद को खत्म करने के लिए उन्होंने न तो सत्ता में रहते कोई प्रतिबद्धता दिखाई और न ही विपक्ष में कभी भी प्रतिबद्धता दिखाई।
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